Backइस घटना के कुछ साल बाद कीमो पॉल वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम में शामिल हो गए और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई. लेकिन उनकी इस कामयाबी को देखने के लिए उनकी बहन इस दुनिया में नहीं थीं. 14 अक्टूबर को पांच विकेट लेकर भारत के हाथ से जीत छीनने के बाद चर्चा में आए इस क्रिकेटर के बचपन से लेकर अंतरराष्ट्रीय करियर तक की पूरी कहानी जानते हैं.
21 फरवरी 1998 को गयाना के सैक्साकैली गांव में डेविड पॉल नाम के एक मछुआरे के घर कीमो पॉल का जन्म हुआ. 105 लोगों की आबादी वाला यह गांव चारों ओर से पानी से घिरा है. एसेक्विबो क्षेत्र में बसे इस गांव में पहुंचने के लिए लोगों को नाव का एकमात्र सहारा है. गयाना में अपने बचपन बिताने वाले कीमो की दिलचस्पी शुरू से ही क्रिकेट में थी. क्रिकेट को करियर बनाने के लिए जिस तरह के संसाधनों और प्रशिक्षण की जरूरत होती है, वे भी आसानी से उपलब्ध नहीं थे.
गांव का जीवन शहरों से अलग था. परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि क्रिकेट खेलने के लिए जरूरी हर सुविधा आसानी से मिल जाती. कीमो के परिवार एक कमरे के मकान में रहता था. कीमो के घर में सात लोग थे. जहां सोने के लिए बिस्तर तक का आभाव था. ऐसे माहौल में पलने-बढ़ने के दौरान किम के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही बड़ी चुनौती थी. लेकिन कीमो के जीवन में एक व्यक्ति ऐसा था, जिसने उनके क्रिकेट खेलने के शौक को बचपन से ही बढ़ावा दिया. वह थे उनके पिता डेविड पॉल.
कीमो ने 2023 में गयाना टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अपने पिता के योगदान के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि उनके पिता बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खिलाते थे. जब कीमो करीब तीन साल के थे, तभी से डेविड उनके साथ गेंदबाजी और बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे.
पिता केवल उन्हें खेलने के लिए प्रेरित नहीं करते थे, बल्कि अभ्यास के लिए जरूरी इंतजाम भी करते थे. उन्होंने सैक्साकैली में अपने बेटे के लिए क्रिकेट पिच तैयार की. विकेट को रोल करना हो या उसे खेलने लायक बनाना, डेविड इसमें खुद जुटे रहते थे.
कीमो जहां भी सॉफ्टबॉल क्रिकेट खेलने जाते, उनके पिता कोशिश करते कि वहां मौजूद रहें. बाद में जब कीमो ने प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया और एसेक्विबो की टीम में जगह बनाई, तब भी पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा. जॉर्जटाउन में होने वाले मैचों तक पहुंचने में भी वह मदद करते थे.
डेविड के लिए बेटे का क्रिकेट खेलना सिर्फ समय बिताने का तरीका नहीं था. वह चाहते थे कि कीमो खेल में आगे बढ़ें. उनके पास बेटे को बड़े क्रिकेट अकादमी में भेजने जैसे साधन नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर जो संभव था, वह किया.
कीमो ने उसी इंटरव्यू में बचपन के दिनों की एक और बात बताई थी. कई बार उनके पिता के पास मैच देखने के दौरान खर्च करने के लिए पैसे नहीं होते थे. इसके बावजूद वह बेटे का खेल देखने पहुंच जाते थे. ऐसे मौकों पर कीमो अपना लंच पिता के साथ बांटकर खाते थे. दोनों आधा-आधा खाना खा लेते और उसी में खुश रहते थे. कीमो ने अपने पिता को मेहनती और अपने जीवन का आदर्श बताया था. उनके मुताबिक, पिता ने उन्हें विनम्र रहने, अपने लक्ष्य पर ध्यान देने और मेहनत करते रहने की सीख दी.
यह साथ केवल मैदान तक सीमित नहीं था. कीमो के शुरुआती क्रिकेट सफर में पिता ने उन्हें अभ्यास कराया, मैचों तक पहुंचने में मदद की और मुश्किल परिस्थितियों में हौसला दिया. आगे चलकर जब कीमो को वेस्टइंडीज की टीम में जगह मिली, तो उस सफलता के पीछे उनके पिता के वर्षों के प्रयास भी शामिल थे.
पिता ने कीमो को क्रिकेट से जोड़ा, वहीं उनकी बड़ी बहन भी उनके जीवन में प्रेरणा का अहम स्रोत थीं. परीक्षा में टॉप करने पर KFC ले जाने का उनका वादा इस बात को दिखाता है कि परिवार की छोटी-छोटी खुशियां कीमो के लिए कितनी मायने रखती थीं.
लेकिन बहन की मौत ने उस खुशी को अधूरा छोड़ दिया. परीक्षा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें खो देना कीमो के जीवन की ऐसी घटना थी, जिसे किसी उपलब्धि से बदला नहीं जा सकता था. बहन के साथ बिताए समय और उनका वादा उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा बने रहे.
कीमो ने धीरे-धीरे अपने खेल से पहचान बनाई. साल 2016 में वह वेस्टइंडीज की अंडर-19 टीम का हिस्सा थे, जिसने भारत को हराकर अंडर-19 विश्व कप जीता था. उस टूर्नामेंट में कीमो ने फाइनल में दो विकेट लिए थे और टीम की जीत में योगदान दिया था.
इसके बाद उन्हें सीनियर क्रिकेट में आगे बढ़ने का अवसर मिला. साल 2018 में उन्होंने वेस्टइंडीज की सीनियर टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया. वह तेज गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी भी कर सकते हैं. इस तरह उन्होंने टीम में ऑलराउंडर के रूप में अपनी जगह बनाने की कोशिश की.
उनके करियर में इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने का मौका भी आया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग तक पहुंचना उस खिलाड़ी के लिए अहम पड़ाव था, जिसने गांव में पिता के साथ अभ्यास करते हुए खेलना शुरू किया था.
कीमो पॉल की टी20 सीरीज में 4 साल बाद वापसी हुई. 14 अक्टूबर को हैदराबाद में भारत के खिलाफ इस सीरीज के चौथे मुकाबले में कीमो ने अपने प्रदर्शन से मैच का रूख बदल दिया. पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप के नाबाद 102 रन की मदद से 20 ओवर में 247 रन बनाए.
भारत को जीत के लिए 248 रन चाहिए थे. संजू सैमसन ने 56 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी, लेकिन कीमो ने उन्हें आउट कर दिया. इसके बाद उन्होंने ईशान किशन का विकेट लिया. पारी के आखिरी हिस्से में उन्होंने नितीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल और प्रिंस यादव को आउट करके अपने पांच विकेट पूरे किए. कीमो ने चार ओवर में 41 रन देकर पांच विकेट लिए. भारत की टीम 223 रन तक पहुंच सकी और वेस्टइंडीज ने 24 रन से मैच जीत लिया. इस जीत के साथ सीरीज 2-2 की बराबरी पर आ गई.