Backहैदराबाद T20 मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा. वेस्टइंडीज ने T20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली. वेस्टइंडीज के कप्तान शे होप ने एक और जबरदस्त शतक ठोंका. हालांकि इन बातों से कोई बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि अभी 17 अक्टूबर को सीरीज का आखिरी मैच खेला जाना है. इस बात की उम्मीद है कि भारतीय टीम उस मुकाबले को जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लेगी. इस उम्मीद के पीछे की वजह वो आंकड़ा भी है जो बताता है कि टीम इंडिया पिछले 4-5 साल से घर में लगातार 2 T20 मैच नहीं हारी है. असली चिंता अर्शदीप सिंह की गेंदबाजी को लेकर है. इसमें भी हम बेवजह आलोचनात्मक नहीं होना चाहते हैं. क्योंकि जिस मैच में दोनों टीमों ने मिलकर 470 रन बनाए हों. जिस मैच में 240 में से 60 गेंदों पर सिर्फ बाउंड्री लगी हो, जिस मैच में 298 रन बाउंड्री से बने हों उसमें 4 ओवर में 52 रन को लेकर भी बहुत चिंता की बात नहीं है.
चिंता की बात अलग और वो है अर्शदीप सिंह का 4 ओवर में 6 वाइड गेंद फेंकना. ये चिंता बढ़ जाती है जब रिकॉर्ड बुक बताती है कि अर्शदीप सिंह T20 फॉर्मेट में सबसे ज्यादा बार 50 रन से ज्यादा लुटाने वाले गेंदबाज बन गए हैं. हैदराबाद में सातवीं बार उनके साथ ऐसा हुआ है. अर्शदीप सिंह अपने करियर में 150 एक्सट्रा गेंद फेंकने वाले गेंदबाज बन गए हैं. इस लिस्ट में वो इकलौते ऐसे गेंदबाज हैं.
एक गेंदबाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है लगातार कुछ नया करते रहना. कुंबले जैसे महान गेंदबाज के सामने ये चुनौती आई थी. बाद में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में ‘गुगली’ को अपनी गेंदबाजी में शामिल किया और कमाल की कामयाबी हासिल की. अर्शदीप सिंह अपनी स्विंग गेंदबाजी की बदौलत टीम इंडिया में आए. लेकिन अब वो स्विंग काफी हद तक ‘मिसिंग’ है. उनकी गेंदबाजी में कोई वेरिएशन नहीं दिखाई देता है. ऐसा लगता है कि वो इस बात का इंतजार करते हैं कि बल्लेबाज गलती करे तो उन्हें विकेट मिले. वो अपनी तरफ से कुछ नया कर पाने की सोच में नहीं दिखते हैं.
अगर आप हैदराबाद में भारतीय गेंदबाजी का आंकलन करेंगे तो आप पाएंगे कि 60 फीसदी से ज्यादा गेंदबाजी ‘हिटिंग एरिया’ में की गई. वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की तुलना में भारतीय गेंदबाजों ने ‘स्लोवर डिलेवरी’ भी कम फेंकी. अर्शदीप सिंह की जिम्मेदारी थी कि वो ना सिर्फ अपनी गेंदबाजी में ‘वेरिएशन’ दिखाएं बल्कि मयंक और प्रिंस यादव को भी गाइड करें. लेकिन अर्शदीप सिंह तो खुद ही पिटाई के डर से ऑफ स्टंप के बाहर ‘वाइड’ बॉल की लाइन से बचते हुए गेंदबाजी करते नजर आए. एक ओवर में तीन-तीन वाइड बॉल ये किसी भी विकेट पर किसी भी टीम के सामने ‘इग्नोर’ की जाने वाली गलती नहीं है.
धोनी ने अपनी कप्तानी में जहीर खान को बॉलिंग कैप्टेन की जिम्मेदारी दी थी. ऐसा नहीं था कि गेंदबाजी से धोनी का कोई मतलब नहीं था बल्कि इसे ऐसे समझिए कि गेंदबाजी को लेकर जहीर खान ‘एक्सट्रा’ जिम्मेदारी उठाते थे. इस लिहाज से देखा जाए तो अभी तीनों ही फॉर्मेट में जसप्रीत बुमराह ही भारतीय गेंदबाजी यूनिट के मुखिया हैं. लेकिन वो चुनिंदा मैच खेलते हैं. सेलेक्शन कमेटी की तरफ से भी ये साफ किया जा चुका है कि बुमराह तीनों फॉर्मेट के मैच खेलेंगे लेकिन सिर्फ जरूरी मैच. जहां दांव पर कोई बड़ी उपलब्धि हो.
ऐसे में T20 में अर्शदीप सिंह को तेज गेंदबाजी यूनिट का मुखिया माना जाता है. लेकिन अगर मुखिया ही गेंदबाजी के अनुशासन से इतनी दूर है तो बाकी गेंदबाजों पर क्या असर पड़ेगा. अर्शदीप को ये समझना होगा कि अभी उनकी जगह सिर्फ एक ही फॉर्मेट में पक्की मानी जाती है, वो है T20. उनका टेस्ट करियर अभी शुरू नहीं हुआ है और वनडे में भी उन्हें जगह कम ही मिलती है. ऐसे में इस तरह की दिशाहीन और बगैर योजना वाली गेंदबाजी से वो अपनी इस जगह को भी खतरे में डाल रहे हैं. दो बार का वर्ल्ड चैंपियन होना टीम में जगह की गारंटी नहीं दिलाता.
अनूप देव सिंह
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का रहने वाला हूं. बचपन से ही खेलों से बेहद प्यार है. खासतौर पर क्रिकेट से जो इस देश का धर्म भी कहा जाता है. स्कूली पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई. साल 2006 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और उसके बाद मीडिया के मैदान में उतर गए और खेल की खबरों को ही अपना कर्म भी बना लिया. करियर की पहली नौकरी नेटवर्क 18 ग्रुप में मिली. शुरुआत IBN7 न्यूज चैनल से हुई जहां मैंने पांच सालों की लंबी पारी खेली. इसके बाद इंडिया टीवी, न्यूज नेशन जैसे बड़े नेशनल चैनल्स के साथ काम किया. 2016 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ये मौका जी नेटवर्क ने दिया. एक साल तक क्रिकेट कंट्री के साथ काम किया और फिर हुई नेटवर्क 18 में वापसी. न्यूज 18 हिंदी की वेबसाइट में 4 सालों तक स्पोर्ट्स की हर खबर पाठकों तक पहुंचाई. अब टीवी9 के साथ हूं. क्रिकेट ही नहीं खेल की हर खबर आपतक एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाता हूं.