Backस्पोर्ट्स डेस्क। उम्र महज एक आंकड़ा है, इसे भारतीय तेज गेंदबाज उमेश यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया है। 38 साल की उम्र में उमेश ने रणजी ट्रॉफी में अपनी रफ्तार और अनुभव का दम दिखाते हुए असम के खिलाफ पंजा खोला। दिसंबर 2024 के बाद अपना पहला रणजी ट्रॉफी मुकाबला खेल रहे उमेश ने दो दिनों में 24 ओवर गेंदबाजी की और पांच विकेट अपने नाम किए। उनके इस प्रदर्शन ने पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट में एक नए अध्याय की शानदार शुरुआत कर दी।
उमेश की धारदार गेंदबाजी के कारण असम की टीम पहली पारी में 373 रन पर सिमट गई। उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 16वीं बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा किया। पंजाब के 26 वर्षीय तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने भी उमेश का अच्छा साथ दिया। दोनों गेंदबाजों ने मिलकर असम के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा और टीम को बड़ा स्कोर खड़ा करने से रोक दिया।
विदर्भ छोड़ पंजाब से जुड़े उमेश
उमेश यादव ने अपने घरेलू क्रिकेट करियर का बड़ा हिस्सा विदर्भ की ओर से खेलते हुए बिताया है। उन्होंने 2008 में विदर्भ के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था। अब 2026-27 सीजन के लिए वह गेस्ट प्लेयर के तौर पर पंजाब की टीम से जुड़े हैं। नई टीम के लिए अपने पहले रणजी मुकाबले में ही पांच विकेट लेकर उन्होंने दिखा दिया कि उनमें अब भी बड़े प्रदर्शन करने की क्षमता है।
चोट ने रोका था करियर, सर्जरी के बाद की वापसी
उमेश यादव ने जून 2023 में ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम की जर्सी में नजर नहीं आए हैं। गंभीर चोट के कारण उन्हें इंग्लैंड में सर्जरी करानी पड़ी और करीब एक साल तक रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा।
लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने पिछले साल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में विदर्भ के लिए प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की। इसके बाद वह लगातार रेड-बॉल क्रिकेट में मौके तलाश रहे थे। पंजाब के साथ जुड़ना इसी दिशा में उनका अहम कदम माना जा रहा है।
IPL में नहीं मिला खरीदार, अब रणजी में दिखाया दम
उमेश यादव को IPL 2026 की नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला। वह इस सीजन खिलाड़ी के तौर पर मैदान पर नहीं उतरे, बल्कि टूर्नामेंट के दौरान कमेंट्री करते नजर आए। हालांकि, अब रणजी ट्रॉफी में पांच विकेट लेकर उन्होंने एक बार फिर अपनी गेंदबाजी की काबिलियत साबित की है।
उमेश का यह प्रदर्शन पंजाब के लिए राहत भरा है। अनुभव और तेज गेंदबाजी के दम पर वह टीम के गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती दे सकते हैं। 38 साल की उम्र में उनकी यह वापसी उन खिलाड़ियों के लिए भी मिसाल है, जो चोट या लंबे अंतराल के बाद फिर से मैदान पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।